शी जिनपिंग ने कज़ान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए प्रस्थान किया

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शी जिनपिंग ने कज़ान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए प्रस्थान किया

शी जिनपिंग की कज़ान यात्रा और ब्रिक्स शिखर सम्मेलन

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 22 अक्टूबर 2024 को कज़ान, रूस में आयोजित 16वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए बीजिंग से प्रस्थान किया है। इस यात्रा का उद्देश्य ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग को और गहरा करने की योजना है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के आमंत्रण पर शी जिनपिंग इस शिखर सम्मेलन में भाग ले रहे हैं, जो ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ-साथ पांच नए सदस्यों की भागीदारी का भी गवाह बन रहा है।

ब्रिक्स में नए सदस्य देशों का प्रवेश

इस बार के शिखर सम्मेलन में ब्रिक्स समूह में पांच नए सदस्य देशों का स्वागत किया जा रहा है। इजिप्ट, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और यूएई अब नए सदस्य बन गए हैं, जिससे समूह की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। इन नए सदस्यों का स्वागत ब्रिक्स के वैश्विक दक्षिण को अधिक प्रभावशाली बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

यह देखा जा रहा है कि कैसे ये नए देश वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक परिदृश्य में अपनी भूमिका निभाएंगे। यह नई व्यवस्था वैश्विक दक्षिण के लिए एक नई दिशा तय कर सकती है, जो दशकों से विकसित देशों के साथ संघर्ष करती आई है। शी जिनपिंग वैश्विक दक्षिण के साझीदारों के साथ सहयोग बढ़ाने की पहल कर रहे हैं।

भारत और चीन के रिश्तों में नयापन

भारत और चीन के रिश्तों में नयापन

इस शिखर सम्मेलन में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात भी संभावित है। हाल ही में पूर्वी लद्दाख में चार साल से चले आ रहे विवाद का समाधान घटनाक्रम को मोड़ सकता है। इन दोनों देशों के बीच विगत में कई विवादित मुद्दे रहे हैं, जिससे द्विपक्षीय संबंध प्रभावित हुए हैं। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ली जियान ने कहा है कि शी और मोदी की मुलाकात की संभावना है, "हम आपको सूचित करेंगे अगर कुछ सामने आता है।"

ब्रिक्स देशों की संभावनाएं

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में इस बार अधिक ध्यान नए सदस्यों के समावेश पर होगा। इसमें चीन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह आर्थिक और राजनीतिक दृष्टिकोण से एक शक्तिशाली देश है। शी जिनपिंग की इस यात्रा का मकसद केवल भारत और चीन के बीच संबंध सुधारना नहीं है, बल्कि ब्रिक्स के सभी सदस्य देशों के साथ संबंधों को मजबूती देना भी है।

भविष्य में श्रीलंका और पाकिस्तान जैसे कई और देश इस समूह में शामिल होने की इच्छा जता चुके हैं, जिससे समूह की वैश्विक उपस्थिति और बढ़ जाएगी। सदस्य देशों के बीच आर्थिक और सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देकर, ब्रिक्स ने अपनी दृष्टि को स्पष्ट कर दिया है कि वे विकसित देशों के वर्चस्व को चुनौती देने के लिए तैयार हैं।

शी की टोली में प्रमुख लोग

शी की टोली में प्रमुख लोग

शी जिनपिंग के साथ उनकी मिशनरी टोली में कई प्रमुख लोग शामिल हैं। जैसे कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के स्थायी समिति के सदस्य और सामान्य कार्यालय के निदेशक, कैइ ची, और चीनी विदेश मंत्री वांग यी। ये लोग चीन की विदेश नीति और ब्रिक्स के साथ संबंधों के प्रबंधन में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

शी जिनपिंग की इस यात्रा का उद्देश्य केवल ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेना नहीं है, बल्कि यहां पर विभिन्न द्विपक्षीय और बहुपक्षीय चर्चाओं का आयोजन भी देखना है। उनका फोकस बड़े पैमाने पर संपर्क और सहयोग को बढ़ावा देना है, जो लंबे समय से चीनी नेतृत्व की प्राथमिकता रही है।

टिप्पणि

Kirti Sihag

Kirti Sihag

22 अक्तूबर / 2024

शी जिनपिंग की कज़ान यात्रा को देख कर लिंगर पोशन में भी ज़्यादा एंट्री नहीं पड़ेगी 😱! ब्रिक्स के नए सदस्य जैसे इजिप्ट, ईरान और सऊदी अरब को देखते हुए अभी से वहीँ के राजनैतिक नाटकों का रोटेशन चल रहा है 😒। क्या उनका मकसद सबको मोड़ना है या सिर्फ अपनी रैंकिंग बढ़ाना? यह सब बहुत ही भयानक है, और आम जनता को इसका क्या फायदा? 🤷‍♀️

Vibhuti Pandya

Vibhuti Pandya

22 अक्तूबर / 2024

यह देखना दिलचस्प है कि ब्रिक्स में विस्तार से आर्थिक सहयोग के नए आयाम सामने आ रहे हैं। सभी देशों के बीच साझा लक्ष्य को समझते हुए हमें सहयोग को बढ़ावा देना चाहिए। एक साथ काम करने से ही सतत विकास संभव है।

Aayushi Tewari

Aayushi Tewari

22 अक्तूबर / 2024

ब्रिक्स को नई सदस्यता प्रदान करने का निर्णय भू‑राजनीतिक समीकरण को बदल सकता है, परन्तु इसके प्रभाव का विश्लेषण विस्तृत रूप से किया जाना आवश्यक है। यह कदम आर्थिक संभावनाओं को विस्तार देगा, किन्तु साथ ही संभावित चुनौतियों को भी प्रस्तुत करेगा।

Rin Maeyashiki

Rin Maeyashiki

22 अक्तूबर / 2024

शी जिनपिंग का कज़ान दौरा न केवल राजनयिक महत्व रखता है, बल्कि कई आर्थिक परिप्रेक्ष्य भी खोलता है। इस दौरे में भारत‑चीन संबंधों की सुधारी भी एक प्रमुख विषय रहेगी, जिससे दोनों देशों के बीच शांतिपूर्ण संवाद को गति मिल सकती है। ब्रिक्स के नए सदस्य देशों का स्वागत एक रणनीतिक कदम है, जिससे समूह की वैश्विक आवाज़ और भी प्रबल होगी। इजिप्ट, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और यूएई के साथ सहयोग के नए आयाम खुलेंगे, जिससे व्यापार में विविधता आएगी। चीन की आर्थिक शक्ति को देखते हुए यह विस्तार कई मौकों का द्वार खोल सकता है। लेकिन इसके साथ ही प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी, जिससे नयी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। इस मंच पर पुतिन के साथ संवाद पॉलिटिकल संतुलन स्थापित करने में मदद करेगा। इस तरह के बड़े शिखर सम्मेलनों से विकासशील देशों के हितों को प्रमुखता मिलेगी। हालांकि, कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह विस्तार मौजूदा आर्थिक असमानताओं को और गहरा कर सकता है। फिर भी, यदि सदस्य राष्ट्र साझेदारी को सुदृढ़ करें, तो यह समूह विश्व मंच पर एक नई शक्ति बन सकता है। शीतकालीन ऊर्जा सहयोग, कृषि तकनीक, और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में संभावनाएँ काफी हैं। यह देखना बाकी है कि इस नवागत समूह में से कौन‑से देश वास्तविक योगदान देंगे। चीन का प्रमुख भूमिका निभाना निश्चित है, क्योंकि वह वित्तीय सहायता और तकनीकी सहयोग प्रदान कर सकता है। इससे कई विकासशील economies को लाभ होगा, विशेषकर उन क्षेत्रों को जो अभी तक औद्योगिक विकास की शुरुआती अवस्था में हैं। अंत में, इस शिखर सम्मेलन के परिणामों को निकटतम समय में देखना पड़ेगा, ताकि यह समझा जा सके कि यह गठबंधन कितनी प्रभावशाली रहेगा।

Paras Printpack

Paras Printpack

22 अक्तूबर / 2024

समझ नहीं आता कि इन नेताओं को अभी भी बिंदास बैठकों की ज़रूरत क्यों है, क्यूँकि दुनिया पहले ही डिजिटल युग में कूद चुकी है। उनका बड़ा किरदार बस इशारों में था, असली काम कहाँ है? 🤔

yaswanth rajana

yaswanth rajana

22 अक्तूबर / 2024

ब्रिक्स के विस्तार के साथ ही हमें सहयोगी ढांचों को सुदृढ़ करने की दिशा में काम करना चाहिए। हम सभी को मिलकर आर्थिक स्थिरता और सतत विकास को प्रतिपादित करने का प्रयास करना चाहिए। इस दिशा में समर्थन और मार्गदर्शन आवश्यक है।

Roma Bajaj Kohli

Roma Bajaj Kohli

22 अक्तूबर / 2024

देशभक्तियों को यह समझना चाहिए कि ब्रिक्स को मजबूत बनाकर ही भारत की असली शक्ति बाहर दिखेगी। इन नई साझेदारियों से इंडो‑चाइनीज आर्थिक जाल का विस्तार होगा, जो राष्ट्रीय हितों के लिये फायदेमंद है।

Nitin Thakur

Nitin Thakur

22 अक्तूबर / 2024

पढ़ो भईयों ये सब खरल है बेमानी और शून्य आशा वाला बात बहीं बहुत देर तक टालते रहो बस एही बकवास

Arya Prayoga

Arya Prayoga

22 अक्तूबर / 2024

अब ब्रिक्स में और लोगों का जोड़ होगा तो बदल जाएगा विचार।

Vishal Lohar

Vishal Lohar

22 अक्तूबर / 2024

क्या आप लोग इस नई सदस्यता के पीछे की जटिल रणनीतियों को समझते हैं? दिमाग़ में एक ही बात घूम रही है-यह सब केवल दिखावे का हिस्सा है, वास्तविक नीति‑निर्माण से दूर।

Vinay Chaurasiya

Vinay Chaurasiya

22 अक्तूबर / 2024

ब्रिक्स का विस्तार, बहुत, बहुत ही, असाधारण, कदम, है, लेकिन, इसका, परिणाम, अभी, स्पष्ट, नहीं, है, ।

Selva Rajesh

Selva Rajesh

22 अक्तूबर / 2024

नज़र के सामने ये सभी बड़े‑बड़े नेता, लेकिन जनता की पीड़ा को भूलकर, सिर्फ अधिकार और शक्ति की दोड़ में लगे हैं! इस मंच पर सिर्फ दिखावा ही चल रहा है, वास्तविक परिवर्तन की तो कोई चाह नहीं।

Ajay Kumar

Ajay Kumar

22 अक्तूबर / 2024

जब राष्ट्रों का तालमेल बढ़ता है, तो इतिहास नए रंग लेता है; यही है आगे का रास्ता।

Ravi Atif

Ravi Atif

22 अक्तूबर / 2024

वाह! यह बातचीत तो बिल्कुल फिल्मी ड्रामा जैसी लग रही है 🎬! लेकिन असल में, अगर सब लोग इतना समर्थन दें तो शायद कुछ असर दिखे। 😅

Krish Solanki

Krish Solanki

22 अक्तूबर / 2024

ब्रिक्स के विस्तार के साथ संभावित आर्थिक सुदृढ़ीकरण की संभावना है, परन्तु यह निहित जोखिमों से मुक्त नहीं है; सावधानीपूर्वक विश्लेषण आवश्यक है।

SHAKTI SINGH SHEKHAWAT

SHAKTI SINGH SHEKHAWAT

22 अक्तूबर / 2024

यह नहीं समझा जा सकता कि विश्व शक्ति के इस पुनः वितरण में कौन‑से गुप्त एलायंस सक्रिय हैं; शायद छिपे हुए एआई‑संचालित एजेंट इस सब को मोड़ रहे हैं।

sona saoirse

sona saoirse

22 अक्तूबर / 2024

देखो भाई ये सारा जोड़ वाला काम तो पूरी तरह से बकवास है , कोई बिनयाद आपसी समझौता भी नहीं करके बस फ्यूज कर रहे हैं।

VALLI M N

VALLI M N

22 अक्तूबर / 2024

सही कहा तुमने! अब तो काबू में निहित है, चलो थोड़ा प्रकट करें 😤💪!

Aparajita Mishra

Aparajita Mishra

22 अक्तूबर / 2024

अरे वाह, ब्रिक्स का विस्तार तो जैसे जलेबी की तरह मीठा है, परन्तु अगर सच्चाई में सुधार नहीं हुआ तो बस चबाने वाला पका रहेगा 😏।

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