10 दिसंबर, 2025 को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर लिस्ट होने वाली विद्या वायर्स लिमिटेड का आईपीओ आवंटन 8 दिसंबर को फाइनल हो गया। यह आईपीओ सिर्फ एक अच्छा प्रदर्शन नहीं, बल्कि इस साल का सबसे ज्यादा सब्सक्राइब हुआ आईपीओ बन गया — कुल 28.53 गुना सब्सक्रिप्शन के साथ। खास बात ये है कि गैर-संस्थागत निवेशक (NIIs) ने अपने हिस्से को 51.98 गुना सब्सक्राइब किया, जो बाजार में इस कंपनी के प्रति जोश का स्पष्ट संकेत है। लेकिन रिटेल निवेशकों के लिए ये एक दर्दनाक लॉटरी बन गई — 25 में से सिर्फ एक को ही पूरा लॉट मिलने की संभावना।
आईपीओ का पूरा चक्र: शुरुआत से लिस्टिंग तक
आईपीओ का बिजनेस तीन दिनों में खत्म हो गया — 3 दिसंबर से 5 दिसंबर, 2025 तक। इस दौरान ₹11,523.55 करोड़ का निवेश हुआ, जबकि आवंटित राशि सिर्फ ₹433.35 करोड़ थी। कंपनी ने ₹48-52 के बैंड में ₹288 शेयर्स के लॉट के साथ आईपीओ लॉन्च किया। इसमें ₹274 करोड़ का नया निवेश और ₹26.01 करोड़ का ऑफर-फॉर-सेल (OFS) शामिल था। इसका मतलब ये हुआ कि कंपनी ने कुल ₹300.01 करोड़ जुटाए। लगभग 18.35 लाख आवेदन आए, जिससे कुल बिड्स ₹6,000 करोड़ के पार पहुंच गए।
निवेशकों का रिएक्शन: निकट निवेशकों ने बनाया रिकॉर्ड
संस्थागत निवेशकों ने सिर्फ 5.12 गुना सब्सक्राइब किया — जो अपेक्षा से कम है। लेकिन NIIs ने बिना डगमगाए 51.98 गुना का जोश दिखाया। ये असाधारण है, क्योंकि ये निवेशक अक्सर बाजार के भावों को समझते हैं और अतिरिक्त जोखिम नहीं लेते। उनका इतना जोश देखकर लगता है कि ये कंपनी अपने सेक्टर में एक नए नेता के रूप में उभर रही है। रिटेल निवेशकों के लिए आवंटन की संभावना केवल 4% थी। यानी अगर आपने एक लॉट आवेदन किया, तो 25 में से एक के बराबर चांस था। ये आंकड़ा इस बात को दर्शाता है कि आईपीओ ने छोटे निवेशकों के बीच भी जबरदस्त भागीदारी पैदा की।
ग्रे मार्केट प्रीमियम और लिस्टिंग की उम्मीद
आईपीओ के दौरान ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) ₹5-6 तक पहुंच गया था, लेकिन आवंटन के बाद ये ₹3-4 पर आ गया। ये एक अजीब बदलाव लगता है — लेकिन फाइनेंशियल एक्सप्रेस के अनुसार, GMP अभी भी 7.7% के आसपास है। इसका मतलब है कि शेयर की लिस्टिंग कीमत ₹56 हो सकती है, जो ₹52 के अंतिम बैंड से 8% ज्यादा है। एक लॉट (288 शेयर्स) के लिए इसका मतलब है — ₹1,152 का लाभ। लेकिन ये सिर्फ अनुमान है। ग्रे मार्केट अक्सर गलत होता है, खासकर जब आवंटन अनिश्चित हो।
आवंटन चेक करने के तरीके: BSE, NSE और MUFG Intime India
अगर आपने आईपीओ में आवेदन किया है, तो आप इन तीन तरीकों से अपना आवंटन स्टेटस चेक कर सकते हैं:
- BSE वेबसाइट: 'Equity' सेलेक्ट करें, 'Vidya Wires' चुनें, और अपना आवेदन नंबर या PAN डालें।
- NSE वेबसाइट: 'Equity and SME IPO Bid Details' पर जाएं, 'Vidya Wires' चुनें, और PAN + आवेदन नंबर दर्ज करें।
- MUFG Intime India: उनकी वेबसाइट पर 'Vidya Wires' चुनें और PAN, आवेदन नंबर, DP ID/Client ID या बैंक खाता नंबर डालें।
आवंटन की घोषणा के बाद, अगर आपको शेयर नहीं मिले, तो आपकी राशि 9 दिसंबर को वापस हो जाएगी। जिन्हें मिले, उनके डीमैट अकाउंट में शेयर्स भी उसी दिन जमा हो जाएंगे।
एंकर इन्वेस्टर्स के लिए लॉक-इन: दो चरणों में बंद
एंकर इन्वेस्टर्स के लिए SEBI के नियम के अनुसार लॉक-इन दो चरणों में होगा। पहले 50% शेयर्स का लॉक-इन 7 जनवरी, 2026 को खत्म होगा — यानी आवंटन के 30 दिन बाद। बाकी 50% का लॉक-इन 8 मार्च, 2026 को खत्म होगा — यानी 90 दिन बाद। ये नियम बाजार में अचानक बिक्री को रोकने के लिए है, ताकि शेयर की कीमत स्थिर रहे।
विद्या वायर्स: चार दशकों का अनुभव
विद्या वायर्स लिमिटेड 1981 में स्थापित, भारत में वाइंडिंग और कंडक्टिविटी उत्पादों के क्षेत्र में टॉप 5 मैन्युफैक्चरर्स में से एक है। इसके उत्पादन सुविधाएं पश्चिमी भारत में हैं, और ये कंपनी 20 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में अपने ग्राहकों को सेवा देती है। इसकी बिजनेस मॉडल बहुत डायवर्सिफाइड है — पावर ट्रांसमिशन, इलेक्ट्रिकल और जनरल इंजीनियरिंग सेक्टर्स के लिए उत्पाद बनाती है। लेकिन ये बिजनेस रिस्क्स के साथ भी भरा हुआ है।
जोखिम और चुनौतियां: जहां निवेश करने से पहले सोचना होगा
कंपनी की आय का बड़ा हिस्सा पश्चिमी भारत पर निर्भर है — अगर यहां कोई आर्थिक मंदी आए, तो पूरी कंपनी प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा, इसके प्रमोटर्स के खिलाफ कुछ विवाद चल रहे हैं, जिनके नतीजे भविष्य में बड़े नुकसान के रूप में आ सकते हैं। आयातित कच्चा माल और निर्यात के कारण विदेशी मुद्रा जोखिम भी मौजूद है। लेकिन इसके फायदे भी हैं — बैकवर्ड इंटीग्रेशन के जरिए गुणवत्ता नियंत्रण और दीर्घकालिक ग्राहक संबंध।
अगला कदम: लिस्टिंग के बाद क्या होगा?
10 दिसंबर को लिस्टिंग के बाद, बाजार इस कंपनी के प्रदर्शन को देखेगा। अगर शेयर ₹56 तक जाता है, तो ये एक बड़ी सफलता होगी। लेकिन अगर ये ₹50 के आसपास रुक जाए, तो भी ये एक ठीक लिस्टिंग मानी जाएगी — क्योंकि इसका आईपीओ तो पहले से ही बहुत ज्यादा सब्सक्राइब हुआ था। अगले 3-6 महीने में ये देखना होगा कि कंपनी के फाइनेंशियल रिजल्ट्स क्या दिखाते हैं। क्या उन्होंने अपनी आय बढ़ाई? क्या लाभ मार्जिन स्थिर रहे? ये सवाल अब बाजार के सामने हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
विद्या वायर्स आईपीओ में रिटेल निवेशकों को कितना शेयर मिला?
रिटेल निवेशकों के लिए आवंटन की संभावना केवल 4% थी। यानी 25 आवेदनों में से सिर्फ एक को ही पूरा लॉट (288 शेयर्स) मिला। इसका मतलब है कि अधिकांश रिटेल निवेशकों को शेयर नहीं मिले। यह आईपीओ के बहुत अधिक सब्सक्राइब होने के कारण हुआ, जिसमें गैर-संस्थागत निवेशकों ने 51.98 गुना सब्सक्राइब किया।
शेयर्स कब डीमैट अकाउंट में जमा होंगे?
आवंटन की घोषणा के अगले दिन, 9 दिसंबर, 2025 को सफल निवेशकों के डीमैट अकाउंट में शेयर्स जमा हो जाएंगे। इसके बाद ही 10 दिसंबर को बॉम्बे और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टिंग होगी। अगर आपको शेयर नहीं मिले, तो आपकी राशि भी उसी दिन वापस हो जाएगी।
एंकर इन्वेस्टर्स के लिए लॉक-इन क्यों है और कब खत्म होगा?
SEBI के नियम के अनुसार, एंकर इन्वेस्टर्स के 50% शेयर्स का लॉक-इन 30 दिन बाद, यानी 7 जनवरी, 2026 को खत्म होगा। बाकी 50% का लॉक-इन 90 दिन बाद, यानी 8 मार्च, 2026 को। ये नियम बाजार में अचानक बिक्री और कीमत गिरावट को रोकने के लिए है।
ग्रे मार्केट प्रीमियम क्या है और ये लिस्टिंग पर कैसे असर करता है?
ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) आईपीओ लिस्टिंग से पहले अनौपचारिक बाजार में शेयर की कीमत का अनुमान है। विद्या वायर्स के लिए GMP ₹5-6 से घटकर ₹3-4 हो गया, लेकिन फाइनेंशियल एक्सप्रेस के अनुसार अभी भी 7.7% है। ये बताता है कि लिस्टिंग पर ₹56 की संभावना है — जो आईपीओ प्राइस से 8% ज्यादा है। लेकिन ये अनुमान है, न कि गारंटी।
विद्या वायर्स के लिए बड़ी चुनौतियां क्या हैं?
कंपनी की आय का बड़ा हिस्सा पश्चिमी भारत पर निर्भर है, जो आर्थिक अस्थिरता के लिए जोखिम है। इसके प्रमोटर्स के खिलाफ कुछ कानूनी मामले चल रहे हैं, जिनके नतीजे भविष्य में नुकसान के रूप में आ सकते हैं। आयातित कच्चा माल के कारण विदेशी मुद्रा जोखिम भी मौजूद है। इसके बावजूद, उनकी बैकवर्ड इंटीग्रेशन और ग्राहक संबंधों की मजबूती एक अच्छा संकेत है।
क्या विद्या वायर्स आईपीओ एक अच्छा निवेश है?
लिस्टिंग के बाद शॉर्ट-टर्म में लाभ की संभावना है, लेकिन लंबे समय के लिए आपको कंपनी के फाइनेंशियल परफॉर्मेंस, लाभ मार्जिन और बाजार हिस्सेदारी पर नजर रखनी होगी। ये एक अनुभवी कंपनी है, लेकिन उसकी आर्थिक स्थिति अभी तक बाजार के सामने नहीं आई है। इसलिए निवेश करने से पहले अपने रिस्क टॉलरेंस को ध्यान में रखें।
Vishala Vemulapadu
18 दिसंबर / 202528.53x subscription? Bhai, yeh toh IPO ka naya record hai, lekin retail ke liye toh lottery ban gaya. 25 mein se ek ka chance? Yeh toh zyada tar logon ke liye emotional rollercoaster ban gaya.