आयकर विभाग (Income Tax Department) आपकी आय पर टैक्स प्रशासन संभालता है। यह PAN जारी करता है, TDS/टीसीएस रिकॉर्ड रखता है, ITR प्रोसेस करता है और रिफंड व नोटिस जारी करता है। अगर आप टैक्सपेयर हैं तो इसकी सेवाओं को समझना बहुत काम आएगा।
PAN और TAN विकेन्द्रीकृत पहचान हैं जो हर वित्तीय लेनदेन में काम आती हैं। आयकर विभाग की e-filing वेबसाइट (https://www.incometax.gov.in) से आप ITR दाखिल कर सकते हैं, रिफंड स्टेटस चेक कर सकते हैं, और नोटिस का जवाब दे सकते हैं। Form 26AS में आपकी TDS/क्रेडिट डिटेल्स रहती हैं—इसे फाइलिंग से पहले जरूर चेक करें।
ITR की प्रकारों (ITR-1, ITR-2 आदि) को समझना जरूरी है—साधारण सैलरी या पेंशन वाले लोग ITR-1 में दाखिल करते हैं, जबकि संपत्ति या व्यवसायी आय होने पर अलग फॉर्म चाहिए। e-Verify करना न भूलें; बिना e-verify किये ITR प्रोसेस नहीं होती।
1) जल्दीन: आम तौर पर अनऑडिटेड व्यक्तियों की ITR दाखिल करने की डेडलाइन 31 जुलाई होती है और ऑडिट मामलों के लिए तारीख अगले महीनों में होती है—लेकिन साल दर साल बदल सकती है, इसलिए विभाग की वेबसाइट देखें।
2) रिफंड ट्रैकिंग: ITR जमा होने के बाद रिफंड स्टेटस e-filing पोर्टल पर और बैंक स्टेटस से चेक करें। कई बार PAN या बैंक डिटेल गलत होने पर रिफंड रुक जाता है—डाटा सही रखें।
3) नोटिस मिले तो घबराएं नहीं: नोटिस में कारण पढ़ें—अमूमन गलत स्लिप, TDS मिसमैच या पैन संबंधित त्रुटि होती है। जवाब देते समय दस्तावेज अपलोड करें और समयसीमा पर रिटर्न कर दें। जरूरत पड़े तो CA/टैक्स सलाहकार से सलाह लें।
4) Form 26AS वेकिफाई करें: किसी भी असंगति के लिए Form 26AS सबसे पहला संदर्भ है। आप यहाँ से देखेंगे कि आपके ऊपर कितनी TDS दिखाई गई है और कौन सी कटौती रिकॉर्ड हुई है।
5) सुरक्षित लॉगिन: e-filing अकाउंट के लिए मजबूत पासवर्ड और 2-स्टेप वेरिफिकेशन का प्रयोग करें। सार्वजनिक कंप्यूटर पर लॉगिन करने से बचें।
6) दस्तावेज रखें: साल भर के स्लिप, बैंक स्टेटमेंट, निवेश प्रमाण और रसीदें सुरक्षित रखें—आडिट या नोटिस आने पर ये तुरंत काम आएंगी।
अगर आप टैक्स से जुड़ी कोई खास समस्या देख रहे हैं—ITR फॉर्म चुनना, रिफंड नहीं मिलना, या नोटिस का जवाब—तो साइट के संबंधित सेक्शन और हेल्पडेस्क सबसे पहले चेक करें। कभी-कभी समस्या सिर्फ छोटा डेटा एरर होती है जिसे सही कर के मिनटों में सुलझाया जा सकता है।
आखिर में, आयकर विभाग की डिजिटल सेवाएँ आपकी टैक्स फाइलिंग को सरल बनाती हैं—थोड़ा ध्यान और सही दस्तावेज रखकर आप ज्यादातर समस्याएँ खुद हल कर सकते हैं।