शनि अमावस्या: इस दिन क्यों माना जाता है भारी असर और कैसे करें पूजा

जब शनि अमावस्या, एक ऐसा दिन जब चंद्रमा और सूर्य दोनों एक ही राशि में होते हैं और शनि देव का प्रभाव सबसे ज्यादा मजबूत होता है. इसे शनि दिवस, या शनि का सबसे शक्तिशाली दिन माना जाता है। ये दिन केवल एक तारीख नहीं, बल्कि एक ऐसा समय है जब लोग अपने कर्मों के बोझ को समझते हैं, अपने भयों को सामने करते हैं, और शनि देव की कठोर लेकिन न्यायपूर्ण शक्ति को अपनाने की कोशिश करते हैं। ये दिन किसी के लिए डर का प्रतीक हो सकता है, तो किसी के लिए बदलाव का अवसर।

शनि देव को काल सर्प, शनि का एक प्रतीकात्मक रूप जो समय, कर्म और नियति का प्रतिनिधित्व करता है भी कहा जाता है। ये नाम सिर्फ डरावना नहीं, बल्कि सच्चाई को दर्शाता है—जो काम आपने छोड़ दिया, जो जिम्मेदारी भूल गए, जो लोग नजरअंदाज कर दिए, वो सब इस दिन वापस आते हैं। शनि अमावस्या का मतलब है कि आपका भविष्य आपके अतीत पर टिका हुआ है। ये दिन आपको बताता है: बदलाव के लिए अभी भी देर नहीं हुई।

इस दिन लोग शनि देव, कृष्ण रंग का देवता, जो अन्याय, लालच और अहंकार को दंड देते हैं और ईमानदारी, मेहनत और धैर्य को बख्शते हैं की पूजा करते हैं। शनि को तिल, लोहे की चूड़ियाँ, काला धान, और शनि के नाम का जाप करके प्रसन्न किया जाता है। कुछ लोग इस दिन गंगा जल में तिल डालते हैं, कुछ अपने घर के बाहर काले कपड़े में तिल और जल डाल देते हैं। ये सब निश्चित नियम नहीं, बल्कि एक आंतरिक अनुशासन का तरीका है—जो आपको याद दिलाता है कि जीवन में कोई भी चीज बिना मेहनत के नहीं मिलती।

शनि अमावस्या आपको बताती है कि जो भी आपके साथ हो रहा है, वो अचानक नहीं हुआ। ये आपके कर्मों का परिणाम है। अगर आपको लगता है कि आपके जीवन में कुछ नहीं बदल रहा, तो ये दिन आपको खुद से सवाल पूछने का मौका देता है। क्या आपने अपने जीवन के छोटे-छोटे कामों को भी ईमानदारी से किया? क्या आपने किसी को बेकार नुकसान पहुँचाया? क्या आपने अपने वचन निभाए?

इस दिन की पूजा का मकसद सिर्फ भगवान को खुश करना नहीं, बल्कि खुद को सुधारना है। शनि देव को भेंट देने के बजाय, आप अपने आप को भेंट कर दें। एक बार जब आप अपनी गलतियों को स्वीकार कर लें, तो शनि का दंड नहीं, बल्कि उनका साथ आपके साथ हो जाता है।

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20 नव॰ 2025
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