पदक (मेडल) सिर्फ धातु की पट्टी नहीं होते — ये किसी खिलाड़ी, टीम या व्यक्ति की मेहनत और सफलता का सबसे साफ़ पैमाना होते हैं। ओलंपिक, एशियन गेम्स, राष्ट्रीय चैम्पियनशिप या किसी अंतर‑कक्षा प्रतियोगिता में पदक जीतना सम्मान, करियर मोड़ और देश की शान दोनों बन जाता है। आप अक्सर गोल्ड, सिल्वър और ब्रॉन्ज के बारे में सुनते हैं, पर समझिए कि हर पदक के पीछे प्रक्रिया और कहानी होती है।
आम तौर पर तीन मुख्य प्रकार के पदक होते हैं: गोल्ड (पहला स्थान), सिल्वेर (दूसरा), और ब्रॉन्ज (तीसरा)। कुछ टूर्नामेंट ट्रॉफी या प्रमाणपत्र के साथ और पुरस्कार राशि भी देते हैं। पदक का मूल्य केवल धातु में नहीं होता—यहathlete की रणनीति, तैयारी और प्रतियोगिता के स्तर से तय होता है। कब कौन‑सा पदक अधिक सम्मान दिलाता है? अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट और ओलंपिक का गोल्ड सबसे बड़ा माना जाता है, जबकि राष्ट्रीय चैंपियनशिप भी खिलाड़ी के करियर के लिये अहम होते हैं।
पदक के निर्णय आम तौर पर जजिंग, टाइमिंग या स्कोरिंग पर निर्भर करते हैं। टीम स्पोर्ट्स में सर्वाधिक जीत का श्रेय समूही प्रदर्शन को मिलता है, जबकि इंडिविजुअल खेलों में खिलाड़ी की निरंतरता मायने रखती है। कई बार टेक्नोलॉजी (जैसे VAR या टाइम‑कीपिंग सिस्टम) भी रिजल्ट तय कर देती है, इसलिए निष्पक्षता बड़ी भूमिका निभाती है।
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