मतदाता सूची: भारत में वोटिंग कैसे काम करती है और आपका नाम कहाँ है

जब आप वोट देने जाते हैं, तो आपका नाम मतदाता सूची, एक ऐसी ऑफिशियल लिस्ट है जिसमें भारत के हर योग्य नागरिक का नाम, पता और वोटिंग विवरण दर्ज होता है, जिसे निर्वाचन आयोग अपडेट करता रहता है में होना जरूरी होता है। अगर आपका नाम इसमें नहीं है, तो आप वोट नहीं दे सकते—चाहे आप कितनी भी जल्दी पहुँच जाएँ। ये सूची सिर्फ एक कागज नहीं, बल्कि आपका लोकतंत्र में हक है।

ये सूची कैसे बनती है? निर्वाचन आयोग हर साल नए नागरिकों को जोड़ता है, जिनकी उम्र 18 साल हो जाती है। साथ ही, जिनका पता बदल गया है या जिनका नाम गलती से निकल गया है, उनके लिए ऑनलाइन अपडेट का ऑप्शन है। आप निर्वाचन आयोग, भारत में चुनावों को नियंत्रित करने वाली संस्था जो मतदाता सूची, ईवीएम और वोटिंग प्रक्रिया की निगरानी करती है की वेबसाइट पर जाकर अपना नाम खोज सकते हैं। बस अपना नाम, पिता का नाम या ईवीएम नंबर डालें—कुछ ही सेकंड में पता चल जाता है कि आप वोट कर सकते हैं या नहीं। अगर नाम नहीं है, तो आप फॉर्म 6 भरकर अपना नाम जोड़ा जा सकता है।

कई लोग सोचते हैं कि मतदाता सूची सिर्फ चुनाव से पहले ही जरूरी होती है। लेकिन अगर आपका पता बदल गया है, तो आपको नई वोटिंग विधानसभा में अपडेट कराना होगा। वरना आपका वोट अमान्य हो सकता है। इसीलिए ये सूची आपकी जिंदगी का हिस्सा है—जैसे आधार कार्ड या पैन कार्ड। ईवीएम, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन जिसके जरिए भारत में वोट दिए जाते हैं, और जिसकी विश्वसनीयता मतदाता सूची पर निर्भर करती है के बारे में तो सब जानते हैं, लेकिन कम लोग जानते हैं कि इसकी पूरी प्रणाली मतदाता सूची पर टिकी है। अगर सूची गलत है, तो ईवीएम भी बेकार है।

अभी तक कई गाँवों में लोग अपना नाम चेक नहीं करते। फिर चुनाव दिन आता है, वोटिंग स्टेशन पर पहुँचते हैं, और अचानक पता चलता है कि उनका नाम नहीं है। इसका असर सिर्फ एक वोट नहीं, बल्कि एक पूरे इलाके की आवाज़ बंद हो जाने पर पड़ता है। आपका वोट आपकी आवाज़ है—और मतदाता सूची वह दरवाज़ा है जिससे आप अपनी आवाज़ बाहर निकाल सकते हैं।

इस पेज पर आपको ऐसे ही कई असली कहानियाँ मिलेंगी—जहाँ लोगों ने अपनी मतदाता सूची को अपडेट करके बदलाव लाया, जहाँ युवाओं ने अपने दोस्तों को वोट के लिए प्रेरित किया, और जहाँ निर्वाचन आयोग की नई पहलों ने लाखों नागरिकों को जोड़ा। ये सब ऐसी घटनाएँ हैं जो सिर्फ खबर नहीं, बल्कि आपके भविष्य को भी बदल सकती हैं।

26 नव॰ 2025
SIR 2.0 शुरू: 51 करोड़ मतदाताओं की सूची का गहन पुनरीक्षण, 12 राज्यों में घर-घर जांच

भारत निर्वाचन आयोग ने 4 नवंबर 2025 से 12 राज्यों में SIR 2.0 शुरू किया है, जिसमें 51 करोड़ मतदाताओं की सूची का गहन पुनरीक्षण किया जा रहा है। अंतिम सूची 7 फरवरी 2026 को जारी होगी।

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