चुनाव प्रक्रिया: भारत में मतदान, मतगणना और चुनावी नियम क्या हैं

भारत की चुनाव प्रक्रिया, एक विशाल लोकतांत्रिक मशीन है जो हर पांच साल में लाखों मतदाताओं के मतों को संग्रहित, गिनती और परिणाम घोषित करती है. इसे निर्वाचन प्रणाली भी कहते हैं, और यह दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक घटना है। यहाँ कोई भी उम्मीदवार नहीं जीतता बिना आम आदमी के मत के। ये मत कैसे डाले जाते हैं? कौन गिनती करता है? और क्यों EVM को भरोसा किया जाता है? इन सवालों के जवाब आपको इसी पृष्ठ पर मिलेंगे।

निर्वाचन आयोग, भारत का संवैधानिक निकाय है जो पूरी चुनाव प्रक्रिया को नियंत्रित करता है। ये लोग चुनाव तारीखें तय करते हैं, मतदान केंद्र बनाते हैं, और EVM और VVPAT मशीनों की जांच करते हैं। इनकी निष्पक्षता ही भारत के चुनावों की विश्वसनीयता की नींव है। आपने कभी सोचा है कि एक गाँव में 500 मतदाता और एक शहर में 50,000 मतदाता — दोनों के मत एक ही तरह से गिने जाते हैं? इसका राज़ है मतदान, एक गोपनीय, समान और निःशुल्क प्रक्रिया जहाँ हर मत का वजन बराबर होता है। कोई भी नहीं बता सकता कि आपने किसे वोट दिया, लेकिन आपका मत जरूर गिना जाएगा।

मतगणना, चुनाव की सबसे तनावपूर्ण और निर्णायक पल है, जब सभी EVM के डेटा एक साथ जुड़कर नतीजा देते हैं। ये गिनती चुनाव दिन के बाद ही शुरू होती है, और एक ही समय पर पूरे देश में होती है। इसमें कोई देरी नहीं, कोई फर्जीवाड़ा नहीं। यही वजह है कि भारत के चुनाव परिणाम दुनिया भर में सबसे तेज़ और विश्वसनीय माने जाते हैं। आपको शायद याद होगा कि 2024 के चुनाव में देश के 90 करोड़ से अधिक मतदाताओं ने भाग लिया — और सभी के मतों की गिनती एक ही दिन में हो गई।

इस पृष्ठ पर आपको ऐसे ही वास्तविक चुनावों से जुड़े लेख मिलेंगे — जहाँ आप समझ पाएंगे कि एक गाँव के मतदाता कैसे देश का भविष्य तय करता है, या कैसे एक टेस्ट वोटिंग सिस्टम ने चुनावी धोखे को रोक दिया। आपको मिलेंगे उन घटनाओं के विवरण जिन्होंने भारत के लोकतंत्र को और मजबूत बनाया।

26 नव॰ 2025
SIR 2.0 शुरू: 51 करोड़ मतदाताओं की सूची का गहन पुनरीक्षण, 12 राज्यों में घर-घर जांच

भारत निर्वाचन आयोग ने 4 नवंबर 2025 से 12 राज्यों में SIR 2.0 शुरू किया है, जिसमें 51 करोड़ मतदाताओं की सूची का गहन पुनरीक्षण किया जा रहा है। अंतिम सूची 7 फरवरी 2026 को जारी होगी।

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