क्या आप जानते हैं कि भारत में सड़क दुर्घटनाएँ हर साल हजारों परिवारों की जिंदगी बदल देती हैं? छोटी-छोटी आदतें बदलकर आप खुद और अपने परिजनों की सुरक्षा बढ़ा सकते हैं। नीचे ऐसे व्यावहारिक और तुरंत लागू होने वाले नियम हैं जिन्हें अपनाकर आपको फायदेमंद असर मिलेगा।
गाड़ी चलाने से पहले अपनी गाड़ी या बाइक की बेसिक जांच करें: टायर का प्रेशर सही है या नहीं, ब्रेक ठीक काम कर रहे हैं, लाइट और इंडिकेटर काम कर रहे हैं। हेलमेट अच्छी क्वालिटी का और सही साइज़ का चुनें — ढीला हेलमेट सुरक्षा नहीं देता। कार में हमेशा सीटबेल्ट पहनें; सीटबेल्ट गंभीर चोटों को कम करने में मदद करती है।
अगर थका हुआ महसूस हो तो ड्राइव मत कीजिए। तेज़ ड्राइविंग और नींद की कमी दोनों खतरनाक होते हैं। छोटे ब्रेक लें, पानी पिएं और जरूरत पड़ने पर किसी दूसरे से गाड़ी चलवाएँ।
फोन पर बात करते या मैसेज करते हुए ड्राइव न करें। हैंड्स-फ्री भी ध्यान भटकाता है। अगर किसी कॉल या मैसेज का जवाब देना जरूरी हो तो सुरक्षित जगह पर गाड़ी रोक कर ही देखें।
स्पीड लिमिट का पालन करें—शहरों और स्कूल ज़ोन में कम स्पीड रखें। ओवरटेक सोच-समझ कर और सही स्थिति में ही करें। तेज़ और अचानक ब्रेकिंग से पीछे चलने वाली गाड़ियों को खतरा होता है, इसलिए दूरी बनाए रखें।
बच्चों के लिए चाइल्ड सीट का इस्तेमाल जरूरी है। बाइक पर बच्चे के लिए अलग से डिजाइन की गई सीट या केज का इस्तेमाल करें। पैदल चलने वालों को प्राथमिकता दें—सिग्नल और फुटपाथ का सम्मान करें।
रात में ड्राइविंग करते समय बीम सही रखें, ब्लाइंड स्पॉट्स पर ध्यान दें और शराब पीकर कभी गाड़ी न चलाएँ। अगर किसी वजह से आपकी नजर कम हो या दवा ले रहे हों जो नींद लाती है, तो वाहन मत चलाएँ।
अगर दुर्घटना हो जाए तो सबसे पहले अपनी और दूसरों की सुरक्षा पर ध्यान दें: गाड़ी रोकें, इमरजेंसी हाज़ार्ड लाइट ऑन करें, 112 पर कॉल करके मदद मांगें और स्थिति स्पष्ट व शांत ढंग से बताएं। गंभीर चोटों वाले व्यक्ति को बिना विशेषज्ञ मदद के ज़रूरत से अधिक हिलाएँ नहीं—सही प्राथमिक चिकित्सा मदद पहुंचने तक खून रोकने और साँस पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है।
छोटी-छोटी आदतें बड़े फर्क लाती हैं। आज से ही हेलमेट और सीटबेल्ट को नियम बनाइए, फोन का उपयोग ड्राइव के दौरान बंद रखिए और हमेशा सड़क पर सावधानी रखिए। अगर आप चाहें तो अपने दोस्तों और परिवार के साथ ये टिप्स शेयर कर उनका भी जीवन सुरक्षित करिए।