ICU यानी Intensive Care Unit गंभीर बीमार या चोटिल मरीजों के लिए स्पेशल वार्ड है। यहां मरीजों पर लगातार निगरानी रहती है, मशीनें सांस और जीवन रक्षक फंक्शन संभाल सकती हैं और डॉक्टर-नर्स की टीम बार‑बार इलाज की समीक्षा करती है। अगर आपके किसी रिश्तेदार को ICU में भर्ती होना पड़ा है तो चिंता स्वाभाविक है, पर समझने से चीजें थोड़ी आसान हो जाती हैं।
ICU में मरीज का दिल की धड़कन, ब्लड प्रेशर, ऑक्सीजन स्तर और कई दूसरी चीजें लगातार मॉनिटर की जाती हैं। कई बार वेंटिलेटर, इंट्रावेनस दवाइयां (IV), ड्रिप्स और स्पेशल मॉनिटरिंग उपकरण जरूरी होते हैं। डॉक्टर हर कुछ घंटे में रिपोर्ट देखते हैं और इलाज बदलते हैं। यह जगह शांत लेकिन व्यस्त रहती है — हर निर्णय मरीज की हालत को देखते हुए लिया जाता है।
अलग‑अलग स्तर की ICU होती हैं: कुछ में बुनियादी निगरानी होती है और कुछ में बहुत उन्नत मशीनरी उपलब्ध होती है। अस्पताल के अस्पताल प्रशासन या डॉक्टर से पूछें कि आपके पास किस तरह की सुविधाएँ हैं और क्या उम्मीद रखनी चाहिए।
ICU के नियम और दिनचर्या अक्सर अलग होती है। विज़िट टाइम, फोन अपडेट और एक संपर्क व्यक्ति का नाम लें। अक्सर अस्पताल चाहेंगे कि केवल एक‑दो लोग ही लगातार संपर्क में रहें ताकि संक्रमण और भीड़ न बढ़े।
कुछ आसान लेकिन काम की बातें:
धैर्य रखें। ICU में सुधार अचानक भी हो सकता है और कभी‑कभी धीमा भी। छोटे संकेत — बेहतर ऑक्सीजन, स्थिर ब्लडप्रेशर, बेहतर जवाब — अच्छे संकेत होते हैं।
फाइनेंशियल और लॉजिस्टिक बातें पहले से सोच लें: अस्पताल के खर्च, वीज़िट‑नियम और जो भी सरकारी या प्राइवेट बीमा क्लेम की प्रक्रिया है, उसकी जानकारी रखें। अस्पताल के सोशल वर्कर या बिलिंग डेस्क से मदद मिल सकती है।
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ICU वक्त तनाव भरा होता है, पर सही जानकारी, साफ सवाल और संयम से आप बेहतर फैसले ले पाएंगे और मरीज को भी जरूरी सहयोग मिलेगा। अगर चाहें, मैं आपको ICU से जुड़े सवालों की सूची बना कर दे सकता/सकती हूँ जिसे आप डॉक्टर से पूछ सकें।