चैत्र अमावस्या: धार्मिक महत्व, रीति-रिवाज और भारत में इसकी परंपराएँ

चैत्र अमावस्या एक चैत्र अमावस्या, हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र माह की अंतिम तिथि, जब चंद्रमा और सूर्य एक ही दिशा में होते हैं और चंद्रमा अदृश्य हो जाता है। यह दिन भारतीय संस्कृति में अत्यंत पवित्र माना जाता है। इसे चैत्र कृष्ण अमावस्या भी कहते हैं, और यह दिन न केवल चंद्रमा के अंत का प्रतीक है, बल्कि पितृ ऋण के निराकरण का भी समय है।

इस दिन लोग गंगा, यमुना, सरयू और अन्य पवित्र नदियों में स्नान करते हैं। गंगा स्नान, चैत्र अमावस्या पर गंगा नदी में स्नान करने की परंपरा, जिसे आत्मा के शुद्धिकरण और पापों के निवारण का माध्यम माना जाता है। यह मान्यता है कि इस दिन गंगा का जल विशेष शक्ति से भरा होता है। बनारस, हरिद्वार, राजगीर और रामेश्वरम जैसे स्थानों पर लाखों लोग इस दिन नहाने आते हैं। इसके साथ ही, श्राद्ध, पितृ पूजा की एक रीति, जिसमें परिवार के देहांत हुए पूर्वजों के लिए तिल और अन्न का दान किया जाता है। यह दिन उन लोगों के लिए खास है जिनके पितर अभी तक मोक्ष नहीं पा पाए हैं। दान करना, विशेषकर भोजन, वस्त्र और धन का, इस दिन का एक अहम हिस्सा है।

कई स्थानों पर चैत्र अमावस्या को देव दीपावली के रूप में भी मनाया जाता है, जैसे वाराणसी में जहाँ घाटों पर लाखों दीये जलाए जाते हैं। यह शिव की विजय और गंगा के शुद्धिकरण का प्रतीक है। यहाँ तक कि कुछ क्षेत्रों में इस दिन नवरात्रि की शुरुआत भी मानी जाती है, जहाँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा शुरू होती है। बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में इस दिन घरों में नीम की पत्तियाँ लगाई जाती हैं, जिससे बुरी शक्तियों से बचाव किया जाता है।

अगर आप भी इस दिन को धार्मिक रूप से मनाना चाहते हैं, तो याद रखें — यह सिर्फ रीति नहीं, बल्कि एक अंतर्मन की यात्रा है। आपको जरूरत नहीं है बड़े त्योहार की, बल्कि एक शांत भावना की। एक दीया जलाएं, एक दान करें, और अपने पूर्वजों के लिए एक शांत चिंतन करें। यही वास्तविक चैत्र अमावस्या है।

इस पेज पर आपको चैत्र अमावस्या से जुड़े ताज़ा खबरें, धार्मिक विश्लेषण, और भारत के विभिन्न हिस्सों में इसकी मनाने की अलग-अलग परंपराएँ मिलेंगी। जानिए कि वाराणसी में दीयों की ज्योति कैसे जगमगाती है, और कैसे बिहार के गाँवों में इस दिन को श्राद्ध के साथ मनाया जाता है।

20 नव॰ 2025
चैत्र अमावस्या 2025: शनि अमावस्या के रूप में भूतादि अमावस्या का महत्व, विशेष योग और विधियाँ

चैत्र अमावस्या 2025 शनिवार, 29 मार्च को मनाई जा रही है, जो शनि अमावस्या और भूतादि अमावस्या के रूप में जानी जाती है। इस दिन ब्रह्म योग, इंद्र योग और शिववास योग का संयोग है, जो पितृ दोष निवारण और आध्यात्मिक शुद्धि के लिए अत्यंत शुभ है।

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